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बहुपक्षीय व्यापार बढ़ाना

2008 में वाशिंगटन स्थिंत जी-20 शिखर सम्मेएलन में, नेतागण मालों और सेवाओं के निवेश या व्याकपार में नई बाधाएं खड़ी करने, निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने या निर्यातों को प्रेरित करने वाले विश्वा व्यांपार संगठन के बेतुके उपायों को लागू करने से परहेज करने पर प्रतिबध हुए। 2009 में लंदन स्थिडत शिखर सम्मेुलन में नेतागणों ने वाशिंगटन में की गई अपनी प्रतिबद्धताओं की पुन: पुष्टिप की तथा व्याउपार पर नकरात्म क प्रभाव को न्यूपनतम करने पर भी प्रतिबद्ध हुए। 2009 में पिट्सवर्ग स्थितत शिखर सम्मेपलन में नेताओं ने मुक्त विश्वत व्याशपार को बनाए रखने का वचन दिया तथा 250 बिलियन अमरीकी डालर के व्यापपार वित्तत के नए उपाय का स्वानगत भी किया। वे डब्यू0 टीओ, ओईसीडी, आईएमएफ और संयुक्तप राष्ट्रे व्यायपार और विकास सम्मेालन में गए और तिमाही आधार पर इन प्रतिबद्धताओं की सार्वजनिक सूचना देते हुए अपने-अपने अधिकारों के अंदर स्थि ति का अनुवीक्षण करते रहने का उनसे आग्रह किया। 2010 के टोरंटो शिखर सम्मे लन में नेताओं ने अपनी पूर्ववर्ती प्रतिबद्धताएं दुहरायी। अंत में 2010 के सियोल शिखर सम्मेेलन में व्यानपार को नौ विकास स्तंतभों में से एक के रूप में बहुवर्षीय कार्ययोजना में शामिल किया गया।

जी-20 व्याशपार मंत्री बैठक पहली बार 19 और 20 अप्रैल, 2012 को प्यू रटो वालरटा में आयोजित किया गया। बैठक में विश्वि व्यारपार संबंधी वैश्विाक मूल्य0 श्रृंखलाओं के प्रभाव और व्यािपार, संवृद्धि तथा रोजगारों के बीच की कड़ियों को उजागर किया गया। मंत्रियों ने संकेंद्रित विचार पर जोर दिया कि क्षेत्रीय तथा वैश्विरक आपूर्ति श्रृंखलाएं वर्धमान रूप से जटिल होती गई हैं और उन्हेंद व्याीपक ढंग से समझा जाना चाहिए क्योंंकि उनमें अधिक से अधिक देश हर बार जुड़ते जाते हैं, और उनमें न केवल विनिर्मातागण वरन् कृषिगत माल, अन्यअ उपभोज्यु वस्तुपएं और सेवाएं भी शामिल हैं।

रूसी सभापतित्वा ऐसे सख्त बहुपक्षीय व्यावपार तंत्र उभारने की जरूरत समझता है जो उन स्थि तियों को जिनसे जी-20 के देशों में व्या्पारिक तनाव पैदा होते हैं, संभालकर वैश्विूक समाधान मुहैया करा सकता है। व्या-पार संबंधी रूसी सभापति का जोर उन मामलों के समाधान तलाशने में सहयोग देने पर होगा जिन्हों ने विश्वी व्याापार संगठन में दोहा समझौता चक्र की सफलता को पूरा होने से रोक दिया है। रूसी सभापतित्व में जी-20 निम्नेलिखित तीन मसलों पर ध्याोन देने में, अग्रणी रहेगा, नामत: (i) संरक्षणवाद को रोक देना, (ii) बहुपक्षीय व्याटपार तंत्र का सुदृढ़ीकरण और विकास, तथा (iii) वैश्विजक मूल्य श्रृंखलाएं।