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खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा



सियोल 2010 एमवाईएपी में, विकास के नौ मुख्यक मुद्दों में से एक के रूप में खाद्य सुरक्षा को शामिल किया गया। नीतिगत संगति और समन्व यन बढ़ाना तथा मूल्यय अस्थिोरता में जोखिम घटाना तथा सर्वाधिक कमजोर मुद्दों की सुरक्षा बढ़ाना दो मुख्यम कार्य योजनाएं हैं। यद्यपि उत्पाादन बढ़ाने, पण कीमतों का अनुवीक्षण करने और तकनीकी ज्ञान साझा करने की दृष्टिा से विविध प्रकार की प्रगति हुई है तथापि, अनेक चुनौतियों का सामना किया जाना अभी बाकी है। इसमें ये शामिल हैं – आहार की बढ़ती मांग, ढांचागत गरीबी, दुलर्भ संसाधन, संतुलित कृषि उत्पा दकता, लघु जोत के किसानों की जरूरतें जलवायवीय परिवर्तन, पण्यं मूल्यस अस्थि्रता खासकर माताओं एवं बच्चों का कुपोषण (अवरूद्ध विकास सहित) भूमि एवं पूंजी में महिलाओं के सीमित अधिकार सहित लिंग असमानता मूल्यष श्रृंखला के बीच हानियां, कमजोर अवसंरचना।

सियोल शिखर सम्मेलन से, खाद्य सुरक्षा ने जी-20 वार्ताओं में मुख्य महत्व के स्थान पर कब्जा बना रखा है। जी-20 की फ्रेंच प्रेसीडेंसी के तहत, कृषि मंत्रियों ने जून, 2011 में पेरिस में भेट की और खाद्य कीमतों में अस्थिरता और कृषि पर कार्य योजना तैयार की ताकि विश्व में बढ़ती हुई खाद्य मांग और साथ ही मूल्य अस्थिरता के प्रभाव से निपटा जा सके। मेक्सिको जी-20 प्रेसीडेंसी में जी-20 देशों के उप-मंत्रियों/कृषि प्रतिनिधियों ने 18 मई, 2012 को मेक्सिको सिटी में वार्ता की। वार्ता का मुद्दा कृषि उत्पादन और उत्पादकता विकास को बढ़ाने हेतु उपयुक्त अर्थोपाय तैयार करना था। जी-20 लिडर्स लॉस काबोस सम्मेलन में, जी-20 सदस्यों ने उष्णकटिबंधीय कृषि प्लेटफार्म, कृषि जोखिम प्रबंधन के लिए प्लेटफार्म, जीयो वैश्विक कृषि निगरानी, गेहूं, चावल और मक्का के लिए अनुसंधान पहलें, तीव्र प्रतिक्रिया फोरम, क्षेत्रीय आपातकालीन खाद्य भंडार, वैश्विक कृषि एवं खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम और उत्तरदायी कृषि निवेश के सिद्धांतों के लिए समर्थन जैसी पहलों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता की। उन्होंने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा गैर-वाणिज्यिक मानवीय उद्देश्यों के लिए खाद्य क्रय पर निर्यात प्रतिबंधों और असाधारण करों को हटाने की प्रतिबद्धता की।

खाद्य सुरक्षा कार्यसूची के तहत दो मुद्दे जिन पर रूसी प्रेसीडेंसी ध्यान देगी, कृषि उत्पादन बढ़ाना और अल्प-पोषण के मुद्दे का समाधान करना हैं। जी-20 रूसी प्रेसीडेंसी जी-20 के तत्वाधान में की गई सभी पिछली प्रतिबद्धताओं और स्थापित पहलों जैसे कृषि वृद्धि तंत्र, उष्णकटिबंधीय कृषि तकनीक और उत्पादक प्रणाली, कृषि जोखिम प्रबंधन पर प्लेटफार्म, प्रोषण का स्तर बढ़ाने के लिए आंदोलन के साथ ही अधिक उपयुक्त तंत्रों के व्यावहारिक विकास के उद्देश्य से प्रायोगिक परियोजनाओं और आपातकालीन खाद्य भंडारों की स्थापना और प्रबंधन करने के उपकरणों की विस्तृत श्रृंखला को जारी रखने का प्रस्ताव भी करती है।

कृषि और खाद्य मूल्य अस्थिरता पर जी-20 कार्य योजना, जी-20 कृषि मंत्रियों की 22 और 23 जून, 2011 की बैठक। यहां क्लिक करें।