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ऊर्जा स्थिरता

सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा के विकास के लिए एक पूर्व शर्त है। इसी के साथ, ऊर्जा उद्योग, स्वतयं में जी -20 अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता के विकास का इंजन, दुनिया के सतत विकास की कुंजी, और रोजगार के सृजन के लिए एक उपकरण है।

पिट्सबर्ग शिखर सम्मेलन (सितम्बर 2009) में, जी -20 के नेता इस पर सहमत हुए कि अक्षम बाजार और अत्यधिक अस्थिरता, निर्माता और ऊर्जा के उपभोक्ताओं दोनों को नकारात्मक प्रभावित करता है और स्वीसकार किया कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने में ऊर्जा उत्पादन, खपत और संक्रमण में देशों का एक साझा हित है।

सियोल (नवंबर 2010) और कान (नवंबर 2011) में जी -20 शिखर सम्मेलन में इन विचारों की पुष्टि की गई। जी -20 के एजेंडे के तहत संबोधित मुख्य मुद्दे (क) बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को कम करना (ख) अक्षम जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को नष्ट करना और (ग) बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना को संबोधित किया गया है। मैक्सिकन प्रेसीडेंसी (2012) नीति समीकरण के आगे के महत्वपूर्ण तत्व के रूप में समावेशी हरित विकास और ऊर्जा दक्षता के महत्व पर प्रकाश डाला.

रूसी प्रेसीडेंसी (2013) ने एक नए कार्य समूह ऊर्जा स्थिरता कार्य समूह (ईएसडब्यू समीजी )की स्थापना करके जी -20 ऊर्जा एजेंडा पर विचार विमर्श को सरल बनाया है। ऊर्जा स्थिरता कार्य समूह (ईएसडब्यू-तत्जी ) में निम्नलिखित मुद्दों पर विचार किया जाएगा:

ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों में पारदर्शिता
ऊर्जा दक्षता और ग्रीन ग्रोथ
ऊर्जा के बुनियादी ढांचे का स्वास्थ( विनियमन
ग्लोबल समुद्री पर्यावरण संरक्षण (जीएमईपी)