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नेतृत्व और संरचना

जी -20 एक मंच के रूप में कार्य करती है और एक संगठन नहीं है। इसलिए, इसमें कोई भी स्थायी सचिवालय या प्रबंधन और प्रशासनिक संरचना नहीं है। जी -20 देशों में से किसी एक देश को आवर्ती आधार पर अध्यऔक्ष चुना जाता है जिसे "जी -20 प्रेसीडेंसी" के रूप में बेहतर जाना जाता है। प्रेसीडेंसी उस अवधि के लिए एक अस्थायी सचिवालय स्थापित करता है जब तक वह अध्यहक्ष रहता है। सचिवालय सभी कार्यो का समन्वलय करता है और जी -20 की बैठकों का आयोजन करता है। तत्काल अतीत, वर्तमान और अगले अध्यरक्ष एक "ट्रोइका" का गठन करते हैं और जी -20 के कार्यों में निरंतरता प्रबंधन करते हैं। वर्तमान वर्ष (2013) में, जी -20 प्रेसीडेंसी रूस के पास है। अध्यतक्षता जून, 2012 में मेक्सिको द्वारा उन्हें सौंपी गई थी। रूस यह अध्यंक्षता अगले साल ऑस्ट्रेलिया को सौंप देगा। ऑस्ट्रेलिया के बाद, 2015 में टर्की जी -20 का अध्यषक्ष रहेगा।

एक प्रेसीडेंसी का चयन करने के लिए, 2010 के बाद से एक प्रणाली अस्तित्व में आई जब दक्षिण कोरिया अध्यचक्ष था। तदनुसार, 19 देशों को निम्न 5 क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है:

  • समूह 1: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • समूह 2: भारत, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की
  • समूह 3: अर्जेंटीना, ब्राजील, मेक्सिको
  • समूह 4: फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन
  • समूह 5: चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया

प्रत्येक समूह में अधिकतम चार राष्ट्र होते हैं। अध्यबक्षता समूहों के बीच घूमती है और एक समूह से एक देश एक विशिष्ट वर्ष में चयनित होता है। इस प्रकार, 2010 में समूह 5 में दक्षिण कोरिया अध्यदक्ष था, 2011 में, समूह 4 में फ्रांस अध्यरक्ष था, 2012 में, समूह 3 में मेक्सिको अध्ययक्ष था, 2013 में, समूह 2 में रूस अध्यफक्ष है, और 2014 में , ग्रुप 1 में ऑस्ट्रेलिया अध्यक्ष होंगे।

जी -20 के प्रत्येक सदस्य का प्रतिनिधित्व नेताओं की शिखर सम्मेधलल में राज्य के अपने अध्येक्ष द्वारा किया जाता है। संबंधि नेताओं को (i) उनके वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों, और (ii) शेरपाओं - संबंधित नेताओं के व्यक्तिगत प्रतिनिधियों द्वारा सहायता प्रदान की जाती हैं। वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों को उनके उपाधिकारियों और शेरपाओं को उनके सूस-शेरपाओं द्वारा सहायता प्रदान की जाती हैं।

इस प्रकार, मौटे तौर पर दो माध्यरमों से कार्य किया जाता है: (I)वित्त ट्रैक और (ii) शेरपा के ट्रैक। दोनों ट्रेकतकनीकी विश्लेषण, सलाह और विशिष्ट विषयक मुद्दों पर विशेषज्ञ कार्य समूह और समितियों की बहुत सी सिफारिशों पर निर्भर हैं।

इन कार्य समूहों / कार्यदलों / समितियों आम तौर पर उन्नत एक और जी -20 की एक उन्नात एवं उभरती अर्थव्यवस्था के सदस्य देश की सह-अध्यक्षता हैं। संबंधित जी -20 के सदस्य देशों में दी विषयगत विषयों को निपटान करने वाले मंत्रालयों / विभागों के सरकारी अधिकारियों को उनकी सरकार द्वारा कार्य समूह में सदस्यों के रूप प्रतिनिधि नामित किया जाता है। गैर सदस्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इन कार्य समूहों और कार्यदलों में आमंत्रित किया जाता है।

जी 20 के नेताओं या जी 20 प्रेसीडेंसी द्वारा की गई पहचान के रूप में जी 20 की कृषि मंत्रियों, श्रम मंत्रियों और व्या पार मंत्रियों के रूप में विशिष्ट जी 20 की मंत्रिस्तरीय बैठक महत्व के विशिष्ट विषयों पर आयोजित की जाती हैं। ऐसी मंत्रिस्तरीय बैठकों के परिणाम शेरपाओं के ट्रैक और बाद में नेताओं की घोषणाओं में सहायक होते हैं।