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जी 20 के मुद्दे पर डीईए अनुसंधान कार्यक्रम

2008-2010 के दौरान जी-20 शिखर सम्मे्लनों में विचार-विमर्श मुख्यथ रूप से 2008 के वैश्विंक वित्ती्य तथा आर्थिक संकट को रोकने के लिए अपेक्षित उपायों पर मतैक्ये बनाने पर केंद्रित थे। चूंकि सियोल शिखर सम्मे लन नवंबर, 2010 में आयोजित हो चुका है, इसलिए ध्या्न कार्यसूची पर दिया जा रहा है जैसे मजबूत, संपोषणीय तथा संतुलित विकास के लिए रूपरेखा, अंतर्राष्ट्री य वित्तीजय वास्तुएकला, वित्तीिय क्षेत्र का विनियमन और पर्यवेक्षण, जलवायु परिवर्तन का वित्तरपोषण, जीवाश्मब ईंधन मूल्या अस्थि्रता, स्ववच्छ् ऊर्जा तथा ऊर्जा दक्षता, हरित विकास, खाद्य सुरक्षा आपदा जोखिम प्रबंधन, श्रम और रोजगार मुद्दे, भ्रष्टातचार, व्या‍पार और इससे अधिक।

2008 के वैश्विरक वित्तीयय संकट के दौरान तथा उसके बाद, जबकि उन्ननत अर्थव्यषवस्थाऔएं क्षीण विकास का अनुभव का कर रही थीं, भारत एक ऐसा देश रहा है जो लगातार विकास कर रहा है। भारत वैश्विकक असंतुलनों में अंशदाता भी नहीं रहा है। इनके कारण, भारत जी-20 के महत्वापूर्ण सदस्यअ के रूप में उभरा है जो विश्व की आर्थिक और वित्ती य व्यऔवस्थाऊ को पुन: तैयार करने में प्रभाव डालने तथा अंशदान करने में सक्षम होगा। अत: यह अत्यवधिक महत्व पूर्ण है कि भारत को वैश्विकक घटनाक्रमों के प्रकाश में जी 20 कार्यसूची के अपने आकलन को मेज पर लाना चाहिए तथा अपने हितों पर समझौता किए बिना वैश्वि क सहयोग पर पर्याप्तर विचारों की पेशकश करनी चाहिए। इसे सफलतापूर्वक करने में सक्षम होने के लिए तथा भारत के हितों को और अधिक बढ़ाने में वैश्विहक विचार-विमर्शों में योगदान करने की क्षमता बढ़ाने के लिए, जी 20 सचिवालय तथा आईसीआरआईआर 1.2.2011 से जी 20 मुद्दों पर सहयोग अनुसंधान कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। पर्याप्ति चयन प्रक्रिया के बाद आर्थिक कार्य विभाग ने परिषद को अनुसंधान सहभागी के रूप में चुना था।

कार्यक्रम का व्या पक और दीर्घावधिक उद्देश्य जी 20 में फिलहाल विचार-विमर्श किए जा रहे प्रमुख मुद्दों पर अत्याीधुनिक वैश्विाक सोच से बराबर संपर्क रखना और भारत के दृष्टलकोण से उन्हें अद्यतन बनाना तथा संदर्भित बनाना तथा भारत में सहबद्ध नीति चिंतन पर दृढ़ विचारों को लाने में सहायता करना है। मध्यनवर्ती तथा लघु आवधिक उद्देश्यद हैं: भारतीय परिदृश्य् तथा वार्ता स्थिएति को स्पाष्टन रूप से लाना, भारत द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को सुस्प्ष्टा करना और जी 20 विचार-विमर्श के लिए अन्य देशों के लिए मुद्दोंको समझना। कार्यक्रम में स्थि ति टिप्पपणियों, कार्यनीति संबंधी कागजातों और विकल्पोंे को तैयार करना शामिल है जिसका उद्देश्यि चालू उभरती हुई परिस्थिकतियों अथवा नीतिगत जरूरतों के लिए तीव्र प्रतिक्रिया प्रदान करना है।

अनुसंधान निवेश मुख्यअ मुद्दों पर अत्या धुनिक वैश्वि्क चिंतन से अवगत कराने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जो नीति निर्णय में सहायता करते हैं और जी 20 में भारत की वार्ता स्थिपति में पर्याप्त योगदान करते हैं।